"लाहौर" - एक अच्छी और सच्ची फिल्म
"खेल सिर्फ खेल हैं और उसमे हार-जीत का महत्व सिर्फ हार और जीत से हैं, नकि मुल्क कि प्रतिष्ठा और सम्मान से" यही सन्देश देती हैं फिल्म "लाहौर" दो भाइयों कि कहानी और भारत पाक रिश्तो को किक-बोक्सिंग के खेल के साथ जोड़ कर "लाहौर" फिल्म का ताना बाना बुना गया है वीरेन्द्र सिंह (अनहद) और धीरेन्द्र सिंह (सुशांत सिंह ) दो भाइयों के किरदार में हैं बड़ा भाई धीरेन्द्र जहाँ एक सफल किक-बोक्सर हैं वही छोटा भाई वीरेन्द्र एक उभरता हुआ क्रिकेटर हैं
एशियन चैम्पियनशिप में फ़ाइनल मुकाबले जब धीरेन्द्र का मुकाबला पाकिस्तानी मुक्केबाज नूर मोहम्मद(मुकेश ऋषि) से होता हैं, तो अंको के आधार पर लगभग पराजित हो चुके नूर अपने कोच (सब्यास्ची चक्रवर्ती) के बहकावे में आकर धीरेन्द्र पर पीछे से ऐसा वार करता हैं कि उसकी मौत हो जाती हैं
बड़े भाई कि मौत से पहले ही आहत छोटे भाई वीरेन्द्र को जब ये पता चलता हैं कि दोनों देशो के राजनितिक दबाव के चलते उसके भाई कि मौत को एक दुर्घटना करार दे दिया गया हैं तो वह अपने क्रिकेट कैर्रिएर को दाव पर लगा कर अपने भाई के सपने को साकार करने और उसका पक्ष रखने के लिए किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार हो जाता है और पाकिस्तान के लाहौर में होने वाले गुडविल बोक्सिंग मुकाबले में भाग लेने के लिए कोच एस के राव (फारुक शेख) से गुजारिश करता है इसके बाद फिल्म के जबरदस्त क्लाइमैक्स में क्या होता हैं ये जानने के लिए ये फिल्म देखना ही उचित होगा फिल्म में बोक्सिंग के दृश्य काफी सटीक है और कुछेक हिस्सों को छोड़ दिया जाये तो बाकी समय फिल्म दर्शक को बाँध कर रख पाने में सफल होती हैं कोच की भूमिका में फारुक शेख जबरदस्त छाप छोड़ते हैं, खासकर हैदराबादी लहजे में कहे गए उनके संवाद काफी प्रभावित करते है पाकिस्तानी मनोचिकित्सक की भूमिका में श्रद्धा दास (इदा), वीरेन्द्र और धीरेन्द्र की माँ के किरदार में नफीसा अली (अम्मा) और धीरेन्द्र की प्रेमिका की भूमिका में श्रद्धा निगम (नीला) के पास ज्यादा समय नहीं है फिर भी ये अपने किरदारों के साथ न्याय कर पाने में सफल होती है सुशांत सिंह हमेशा की तरह अपने काम में प्रभावशाली है लेकिन किन्तु अनुभव की कमी आनहद के काम में साफ़ झलकती हैं ख़ास कर भावात्मक दृश्यों में वे अपना प्रभाव नहीं छोड़ पाते कुल मिलाकर यह फिल्म दर्शको को निराश नहीं करेगी किन्तु सिनेमाघरों में कम शो होने, युवाओ में अति चर्चित फिल्म "लव, सेक्स और धोखा" के साथ रिलीज़ और "IPL” की वजह से शायद ज्यादा लोग ये फिल्म नहीं देख पाएंगे
Thursday, March 25, 2010
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पढकर देखने का मन कर तो रहा है....
ReplyDelete....
.यह पोस्ट केवल सफल ब्लॉगर ही पढ़ें...नए ब्लॉगर को यह धरोहर बाद में काम आएगा...
http://laddoospeaks.blogspot.com/2010/03/blog-post_25.html
लड्डू बोलता है ....इंजीनियर के दिल से....
please if possible aap saniya mirza ke bare me information den. o kaisi hain
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