बुधवार, 28 मार्च 2012

वापसी की पोस्ट - फिल्मे

पिछले हफ्ते मैंने दो सस्पेंस थ्रिलर फिल्मे देखी एक बहुत ज्यादा अच्छी और दूसरी उतनी ही ज्यादा बेतुकी !मैं उन फिल्मो का नाम नहीं लूँगा किन्तु आप खुद ही समझ जायेंगे | एक सुलझे हुए किरदारों से भरी हुई दूसरी ऐसी जिसमे कुछ किरदारों को ही नहीं पता चला होगा की वे फिल्म में क्या कर रहे हैं | एक में मुख्य किरदार नायिका तो दुसरे में नायक | एक फिल्म देखने के बाद ऐसा महसूस हुआ की पैसे वसूल हो गए तो दूसरी फिल्म देखने के बाद एसा लगा की ये फिल्म देखी ही क्यों |दोनों ही फिल्मे एक ही विधा की थी किन्तु दोनो में जमीन - आसमान कर फर्क नजर आया | उम्मीद है दूसरी फिल्म के प्रोडूसर को अकल आ जाये और वो अपनी इस फिल्म के सिक्वल में वो गलतियाँ ना दोहराये जो उन्होंने इस फिल्म में की हैं |

बुधवार, 24 अगस्त 2011

धार्मिक यात्रा - 2011

पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी मुझे उत्तर भारतीय संघ की शाखा बोरीवली के बैनर तले और श्री मनोज चतुर्वेदी के नेतृत्व में आयोजित धार्मिक यात्रा में सहभागी होने का अवसर मिला इस बार की यात्रा अत्यंत ही रोचक और भाग दौड़ से भरी हुई थी, इश्वर ने कई स्थानों पर हमारी कठिन परीक्षा भी ली | किन्तु उनके ही आशीर्वाद से हम यात्रा में पूर्व निर्धारित सभी स्थानों पर गए और यात्रा पूरी की | यात्रा के बारे में और जानकारी अगले पोस्ट में | यात्रा की फोटोस के लिए यहाँ क्लिक करे |

गुरुवार, 17 फ़रवरी 2011

क्रिकेट विश्व कप 2011- क्या भारत है दावेदार

क्या इस बार यह क्रिकेट विश्व कप भारतीय टीम जीत पाएगी ? यही सवाल चारो तरफ हर कोई पूछ रहा है, न्यूज़ चैनलों के टॉक शो से लेकर, मोहल्ले की चौपाल तक हर तरफ यही सवाल सुनने को मिल रहा हैं, वैसे तो हमारा राष्ट्रीय खेल हॉकी हैं किन्तु इस प्रकार का माहौल हॉकी के लिए नहीं था जब पिछले वर्ष लगभग इसी समय हॉकी विश्व कप का आयोजन दिल्ली में हुआ था | किन्तु एक बात जो इन दोनों विश्व कप में सामान्य हैं, की ऑस्ट्रेलिया दोनों ही में वर्तमान चैम्पियन है |
इस विश्व कप में कौन फेवरेट है ? कौन डार्क होर्स है ? इन यक्ष प्रश्नों का उत्तर हर कोई खोजने में लगा है, हर कोई अपनी ओर से अपने "expert" कमेन्ट और "expert" सुझाव देने में लगा हुआ है | हम भी पीछे क्यों रहे अपने ब्लॉग पर अपनी राय तो लिख ही सकते हैं | वर्ष २००३ में भी कुछ इसी तरह की दीवानगी थी तब हमें आखरी मैच में ऑस्ट्रेलिया ने रोका था | इस बार ऑस्ट्रेलिया एशेज हारने के बाद घायल शेर की तरह है जो पूरी ताकत से विरोधी टीमो पर झपटेगा किन्तु घूमती गेंदों पर उसके अपेक्षाकृत कम अनुभव वाले बल्लेबाज चल पाएंगे या नहीं यही उनकी किस्मत तय करेगा | हमारा पडोसी मुल्क श्रीलंका भी वर्ल्ड कप के प्रमुख दावेदारों में है, हमारे टीम की तरह उनके पास भी स्पिन गेंदबाजों की अच्छी तादाद हैं, ओर हमेशा की तरह पाकिस्तान भी अपने खेल से दुनिया को चौंका देने की ताकत रखता है ओर यदि किस्मत ने इस वर्ल्ड कप में आख़िरकार दक्षिण अफ्रीका का साथ दिया तो वह भी इस वर्ल्ड कप में कमाल दिखा सकता है | कुल मिलाकर देखा जाये तो यह विश्व कप अब तक सबसे खुला और बराबरी का विश्व कप होगा | तो बिगुल बजाये ओर भारतीय टीम का हौसला बढ़ाये |

शनिवार, 28 अगस्त 2010

उत्तर भारतीय संघ - धार्मिक यात्रा - 2010

उत्तर भारतीय संघ की शाखा बोरीवली के बैनर तले और श्री मनोज चतुर्वेदी के नेतृत्व में विगत सात वर्षो से आयोजित की जा रही धार्मिक यात्रा में सहभागी होने का अवसर इस वर्ष मुझे भी मिला | इस वर्ष तीन दिनों की यह यात्रा १४ से १६ अगस्त के बीच संपन्न हुई | इन तीन दिनों में यात्रा में सहभागी पचास यत्रियो ने महाराष्ट्र के परली वैजनाथ, औंढा नागनाथ और घृष्णॆश्वऱ महादेव के साथ-साथ शिर्डी साईंबाबा के दर्शन का भी लाभ लिया | इन तीर्थ स्थानों के आलावा हम लोग दर्शनीय और यूनेस्को द्वारा भारत के विश्व धरोहर स्थलों में शामिल प्रसिद्ध "एलोरा" की गुफाओ में भी गए | इस यात्रा से सबंधित सारे चित्रों के लिए यहाँ क्लिक करे |
इस यात्रा से जुडी कुछ और बातें ब्लॉग पर आगे भी लिखूंगा |

शुक्रवार, 25 जून 2010

रावण

"रावण" फिल्म देखते समय एक ख्याल जो मेरे मन में रह-रह कर आ रहा था की हमारे अपने देश में इतने खूबसूरत लोकेशनो के होते हुए निर्माता विदेशो का रुख क्यों करते है | फिर ख्याल आया कि शूटिंग करने के लिए सरकारी दफ्तरों से परमिशन लेना, शायद शूटिंग करने से कठिन होगा तो इसमें निर्माताओ को क्यों दोष दे | दुर्भाग्यवश अभिषेक के शानदार अभिनय के अलावा फिल्म के खूबसूरत दृश्य ही है जो दर्शक को बांध कर रख पाने में सफल होते हैं |ऐश्वर्या हमेशा कि तरह अपने अभिनय प्रभावशाली है किन्तु उनके रोले में विविधता नहीं है और पूरी फिल्म में ज्यादातर समय या तो वो किसी खूटे से या किसी पेड़ से बंधी हुई है या "बीरा" कि कैद से भागने की कोशिश में है | पहले हाल्फ में फिल्म काफी बोरिंग लगती है|विक्रम जो कि एक एस.पी. के किरदार में है, अपनी पत्नी नंदिनी (ऐश्वर्या) को खोजने के लिए जंगलो कि खाक छान रहा है, इस हिस्से में दर्शक पूर्वानुमान लगा लेता हैं कि अगले दृश्य में क्या होगा, जिससे बोरियत बढ़ जाती हैं| किन्तु दुसरे हाल्फ में फिल्म तब प्रभावशील होती है, जब बीरा के रावण बनने कि कहानी दिखाई जाती हैं | फिल्म के अंत में एक अत्यंत ही नाटकीय क्लाइमेक्स है, जो कि दर्शक को सोचने पर मजबूर कर देता है कि असली रावण कौन है | वैसे तो ये फिल्म रामायण पर आधारित है किन्तु,निर्देशक मणिरत्नम ने इसमें अपनी सोच को जोड़ा है और फिल्म देखकर दर्शक भी कुछ सोचने के लिए जरूर मजबूर होगा किन्तु छोटे विषय को बड़ा करने कारण फिल्म का स्क्रीनप्ले कुछ कमजोर हो गया है | रवि किशन, विक्रम और गोविंदा ने अपने किरदारों को बखूबी निभाया है, एक छोटे किन्तु महत्वपूर्ण किरदार में तेजस्विनी कोल्हापुरे दर्शक का ध्यान आकर्षित कर पाने में सफल हुई हैं | मेरे हिसाब से फिल्म एक नेत्रसुखद अनुभव हैं और एक बार तो देखी जा सकती हैं |

सोमवार, 19 अप्रैल 2010

उत्तर भारतीय संघ के साठ वर्ष पूर्ण

रविवार, १८ तारीख की शाम मुंबई के प्रसिद्ध षन्मुखानन्द हॉल में उत्तर भारतीय संघ की स्थापना के साठ वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में रखे गए कार्यक्रम में बीती कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण थे विख्यात भोजपुरी गायक और अभिनेता मनोज तिवारी और उनके साथी राजनितिक विरोधाभास के बावजूद दोनों मुख्य राष्ट्रीय पार्टियो के नेता कार्यक्रम में अलग-अलग समय मौजूद रहे, बीजेपी के सरदार तारा सिंह जहाँ कार्यक्रम के शुरुआत में उपस्थित थे वही कांग्रेस के नारायण राणे,एकनाथ गायकवाड, कृपाशंकर सिंह और NCP के छगन भुजबल ने कार्यक्रम अंत में आकर अपने विचार रखे, कांग्रेस के नसीम खान ने भी आक्रामक और जोश से भरे अपने सन्देश में कथनी और करनी में भेद न होने देने की बात कही, देर से ही सही NCP के नरेन्द्र वर्मा भी पहुचें सारे राजनेताओ ने हमेशा की तरह ही राजनितिक बातें की और मुंबई सबकी हैं इस वाक्य का बार बार उपयोग करके उत्तर भारतीय वोट बैंक को अपने पक्ष में रखने की कोशिश करते रहे उत्तर भारतीय संघ के अध्यक्ष श्री आर एन सिंह ने सीधे तौर पर मंच पर उपस्थित मंत्रीयो राणे और भुजबल से भूमि की मांग की जिससे की संघ अपने भविष्य की योजनाओ जैसे उच्च शिक्षा के महाविद्यालय अदि को मूर्त रूप दे सके, जिस पर हर संभव मदद करने का आश्वासन दोनों ही मंत्रियो ने किया, अब देखना हैं की ये कब तक साकार होता है उत्तर भारतीय संघ ने उत्तर भारतीय रत्न के रूप में वार्षिक पुरस्कारों की शुरुवात की जिसके पहले पात्र निर्देशक गजेन्द्र सिंह और अभिनेत्री श्वेता तिवारी बने उत्तर भारतीय समाज तमाम विरोधाभासो के बावजूद निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर हैं इसका उदहारण इस कार्यक्रम में देखने को मिला किन्तु अभी भी कुछ आपसी मतभेद इस समाज को खोखला कर रहे है ऐसा भी प्रतीत हुआ समारोह में पूर्व पुलिस कमिश्नर श्री एम् एन सिंह ने भी शिरकत की इस कार्यक्रम में जबरदस्त समां उस वक्ता बंधा जब मनोज तिवारी ने देवी माँ का मशहूर गीत "बाड़ी शेर पे सवार" गया, इस गीत पर मिले श्रोताओ के प्रतिसाद से मनोज तिवारी भी भाव-विभोर हो गए कार्यक्रम के अंत सुर संग्राम विजेता गायक मोहन राठौर दर्शको को बाँध कर रख पाने में सफल नहीं हो पाए, बीच बीच में हास्य कलाकार सुरेश सावरा ने भी दर्शको का भरपूर मनोरंजन किया कुल मिलकर ये शाम अच्छी ही बीती ऐसा मैं कह सकूँगा

गुरुवार, 1 अप्रैल 2010

रियल लाइफ की "वीर-जारा"

सानिया और शोएब ने शादी करने का फैसला किया है, ये वही शोएब है जिन्हें उनके देश के क्रिकेट बोर्ड ने टीम की हार का जिम्मेदार मानते हुए है एक साल के लिए बैन कर दिया है और ये वही सानिया है जो पिछले कुछ दिनों से अपनी सफलता के लिए कम और अपनी असफलताओ और ग्लैमर के लिए ज्यादा चर्चित रही है सेलेब्रिटीज के पल-पल की खबर रखने वाली मीडिया को भी इस क्रोस बोर्डर प्यार की भनक तक नहीं लगी ये आश्चर्य की बात है, किन्तु इससे ये भी साबित होता है की ये कितने सफल और पेशेवर खिलाडी है और अपना मन जिस खेल में लगाते हैं उसे बड़ी सफाई से खेलते हैं चूँकि इनका ध्यान अपने "प्यार" के खेल में लगा हुआ था इसलिए क्रिकेट और टेनिस के मैदान पर ये अपने जलवे कैसे दिखा पाते शोएब तो अपने खेल में इस लगन से खेले कि उनके देश के बोर्ड ने उन्हें पुरस्कारस्वरूप एक साल के लिए इस खेल को खेलने की पूरी आजादी दे दी और सानिया भी अपने फेवरेट देश ऑस्ट्रेलिया में कुछ ख़ास कमाल नहीं दिखा पाई, और इस खेल में मग्न होकर जब अपने भविष्य के गृहशहर में टेनिस खेलने गयी तो चोट खा बैठी, दिल पर चोट तो लगी ही थी अब शारीर भी चोटिल हो गया चोटिल होकर आप टेनिस तो नहीं खेल सकते किन्तु "प्यार" के खेल को खेलने के लिए तो ऐसी बंदिश नहीं हैं अपनी शादी की घोषणा करने के लिए जब उन्होंने ने प्रेस को बुलाया तो उनसे पुछा गया की भारत-पाक के मैच में वो किसे सपोर्ट करेंगी तो उन्होंने कहा की मैं अपने पति और अपने देश दोनों को सपोर्ट करूंगी, सही भी है पाकिस्तान और उसकी क्रिकेट टीम के हालात ऐसे है की वहा पर कोई देश की टीम नहीं मानो ग्यारह अलग-अलग लोग खेल रहे हो तो पाकिस्तान देश को सपोर्ट करने जैसी बात तो आती ही नहीं सही मायनो में ये जोड़ी हैं रियल लाइफ की "वीर-जारा"

FIGHT OF COVID - VIEW FROM A COMMONER

THE SITUATION IS GRIM AND A VIRUS HAS TAKEN US ALL INTO A SITUATION THAT WE ALL WANT TO GET OUT OF, BUT ARE ANXIOUS, RELUCTANT AND UNABLE ...